भारतीय रक्षा और अर्ध-सैनिक बल


भारतीय रक्षा और अर्ध-सैनिक बल 

भारतीय सशस्त्र बलों की संरचना को समझना 



सशस्त्र बलों (सेना, अर्ध-सैनिक बल, परमाणु कमान इत्यादि) की शीर्ष स्तरीय संरचना निम्नानुसार है :
  • सेना : भारतीय सेना में भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना शामिल है। यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य बल है और इसमें विश्व की सबसे बड़ी स्वैच्छिक सेना है। इसके सर्वोच्च सेनापति भारत के राष्ट्रपति हैं। इसके तीनों सेवा अंगों के अपने प्रमुख होते हैं। इसका शीर्ष अधिकारी चीफ ऑफ़ स्टाफ समिति का अध्यक्ष होता है, जो तीनों सेना प्रमुखों में से सबसे लंबे समय से कार्यरत सेना प्रमुख होता है। ये तीनों सेवाएँ रक्षा मंत्रालय के अधीन होती हैं।
  • राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर)  रक्षा मंत्रालय के अधीन भारतीय थलसेना की शाखा है। यह भारतीय थलसेना के अन्य हिस्सों से प्रतिनियुक्त सैनिकों से निर्मित उग्रवाद-विरोधी और आतंकवाद-विरोधी बल है। आरआर का आधा हिस्सा भारतीय थलसेना के पैदल सेना से प्राप्त किया जाता है और शेष आधा हिस्सा शेष भारतीय थलसेना से लिया जाता है। इस बल को जम्मू कश्मीर में तैनात किया गया है।  इसका गठन जनरल सुनित फ्रांसिस रॉड्रिक्स द्वारा किया गया था और वर्ष 1990 में जनरल बी. सी. जोशी द्वारा इस बल को कश्मीर में उग्रवाद से निपटने के लिए और कमजोर स्थानीय सुरक्षा बलों को सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित बल के रूप में संरचित किया गया। इस बल में 65 बटालियनें हैं। एक विशेषज्ञ आतंकवाद-विरोधी बल के रूप में आरआर की प्रतिष्ठा और प्रतिभा आतंकवादियों को सीधे हमला करने से बचने को मजबूर करती है। 
  • भारतीय तटरक्षक दल (आईसीजी) (एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में तटरक्षक डाक अधिनियम द्वारा वर्ष 1978 में स्थापित) भारत के प्रादेशिक जल प्रदेश पर इसके निकटस्थ क्षेत्र और अनन्य आर्थिक क्षेत्र सहित भारत के सामुद्रिक हितों का संरक्षण करता है और सामुद्रिक कानून का प्रवर्तन करता है। यह बल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। भारतीय तटरक्षक दल भारतीय नौसेना, मत्स्यपालन विभाग, राजस्व विभाग (सीमाशुल्क) और केंद्रीय और राज्य पुलिस बलों के साथ संयोजन में काम करता है। इसमें 15,714 सक्रिय कर्मी, 163 जहाज और 60 विमान शामिल हैं। 
  • भारत का परमाणु कमान प्राधिकरण (एनसीए) : यह भारत के परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में आदेश, नियंत्रण,और संचालन संबंधी निर्णय की दृष्टि से शीर्ष प्राधिकरण है। एनसीए के निर्देश एयर मार्शल के पद (या उनके समकक्ष) के मुख्य सेनापति (कमांडर-इन-चीफ) के नियंत्रण के तहत रणनीतिक बल कमान (एसएफसी) द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं।   
  • अर्ध-सैनिक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (5 + 1 + 1) 
    • देश में कुल पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल हैं जिनमें कर्मियों की संख्या 8 लाख से अधिक है : 
      1. सीमा सुरक्षा बल (सीसुब), [संख्या लगभग 2.6 लाख]
      2. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), [संख्या लगभग 1.2 लाख]
      3. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), जिसमें त्वरित कार्यवाही बल (आरएएएफ) और कोब्रा भी शामिल है, [सख्या लगभग 3.1 लाख]
      4. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), [संख्या लगभग 0.75 लाख], और 
      5. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) [संख्या लगभग 0.75 लाख]
    • देश में असम राइफल्स (एआर) नामक एक केंद्रीय अर्ध-सैनिक बल भी है 
    • ये छह बल (5 + 1) गृह मंत्रालय के अधीन हैं
    • सातवाँ बल एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) है, जो 100 प्रतिशत प्रतिनियुक्ति बल है
    • इनमें से एआर, सीसुब, आईटीबीपी, और एसएसबी ‘सीमा सुरक्षा बल’ हैं, जबकि इआरपीएफ की तैनाती राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के तहत कानून व्यवस्था बनाए रखने, आतंरिक सुरक्षा और उग्रवाद-विरोधी कार्यवाहियों से संबंधित नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए की जाती है
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस के अधिकारियों के अपने कैडर होते हैं, परंतु इनका नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
    • त्वरित कार्य बल (आरएएफ) और कोब्रा सीआरपीएफ के ही अंग हैं – आरएएफ 10 बटालियन वाला दंगा-विरोधी बल है जिसे सांप्रदायिक हिंसा पर प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है ; कमांडो बटालियन दृढ़ कार्रवाई (कोब्रा) एक 10 बटालियन वाला नक्सल-विरोधी / सीओआईएन (उग्रवाद-विरोधी) बल है।
  • केंद्रीय पुलिस बल (“संघीय पुलिस”) : अंडमान एवं निकोबार पुलिस, चंडीगढ़ पुलिस, दिल्ली पुलिस, दादरा एवं नगर हवेली पुलिस, दमन एवं दीव पुलिस, नगर-सैनिक (होम गार्ड), लक्षद्वीप पुलिस, पुडुचेरी पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), और सिशेष सुरक्षा बल (एसपीजी) । 
  • सीमा सुरक्षा : सीमाओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती “एक सीमा, एक सीमा-सुरक्षा बल” के सिद्धांत पर की जाती है। तदनुसार, प्रत्येक सीमा की सुरक्षा एक विशिष्ट सीमा सुरक्षा बल को सौंपी गई है। 
    1. बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमा के लिए सीमा सुरक्षा बल (सीसुब)
    2. चीन की सीमा के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी)
    3. नेपाल और भूटान सीमा के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)
    4. म्यांमार सीमा के लिए असम राइफल्स
  • उपरोक्त के अतिरिक्त, भारतीय थलसेना एलओसी पर पाकिस्तान के साथ लगने वाली भूमि सीमा और एलएसी पर चीन के साथ लगने वाली सीमा की सुरक्षा करती है, और भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को तटीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, जहाँ राज्य (समुद्री) पुलिस दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में सहायता करती है। 
  •  




भारतीय सशस्त्र बलों (सेना) का प्रतीक चिन्ह है 


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तीनों सेवाएँ (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) उनके स्वयं के ध्वजों और प्रतीक चिन्हों द्वारा पहचानी जाती हैं 


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भारतीय सशस्त्र बलों की गौरवशाली परंपरा, हमेशा !


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भारतीय तटरक्षक बल भारत की तटीय सीमाओं की सुरक्षा करता है  


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राष्ट्रीय राइफल्स की कलगी 


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भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों / अर्ध-सैनिक बलों को समझना



यह वर्गीकरण उलझन भरा हो सकता है। निश्चित ही यह था। अतः वर्ष 2011 में एक स्पष्टीकरण जारी किया गया, जैसा नीचे दर्शाया गया है :

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मुख्य अंतर : सेना बनाम केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल / अर्ध-सैनिक बल 

  1. इस पदानुक्रम में सेना शीर्ष पर है, परंतु रक्षा पंक्ति में दूसरे स्थान पर है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल / अर्ध-सैनिक बल अशांत क्षेत्रों से निपटने या गोलियों का सामना करने की दृष्टि से पहले स्थान पर हैं। 
  2. सेना का अपना स्वतंत्र रक्षा बजट होता है (इस पृष्ठ पर आगे दर्शाया गया है), परंतु केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों / अर्ध-सैनिक बलों के लिए कोई समेकित राशि नहीं होती। आवंटित निधियां भी गृह मंत्रालय वापस ले सकता है।
  3. सेना के कर्मियों के लिए मृत्यु पर शहीद का दर्जा। कार्यवाही में मृत्यु से अर्धसैनिक बलों / सीएपीएफ कर्मियों को ये सम्मान नहीं मिलता।  
  4. सेना की ज़िम्मेदारी शांति और मैदानी नियुक्ति के बीच बदलती रहती है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों / अर्ध-सैनिक बलों की तैनाती आवश्यकता-आधारित होती है, इसका अर्थ यह है कि वे बहुत लंबे समय तक मैदान पर रखे जा सकते हैं !
  5. सेना में पदोन्नतियां अनुभव के आधार पर होती हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों / अर्ध-सैनिक बलों में ऐसे अधिकारियों को भी पदोन्नत किया जा सकता है जिन्हें कोई वास्तविक लड़ाई का अनुभव नहीं है।
  6. सशस्त्र सेनाएं रक्षा मंत्रालय के अधीन होती हैं। अन्य सभी बल गृह मंत्रालय के अधीन होते हैं।









असम राइफल्स (एआर)

यह एक केंद्रीय अर्ध-सैनिक बल है और इसका मुख्य कार्य उग्रवाद का मुकाबला करना और सीमा सुरक्षा के कार्य करना है। प्यार से “उत्तर पूर्व के लोगों के मित्र” कहे जाने वाले असम राइफल्स की स्थापना वर्ष 1853 में “कचेर लेवी” के रूप में की गई थी, और यह देश का सबसे प्राचीन अर्ध-सैनिक बल है। इसका मुख्यालय शिलांग में है और इस बल की तैनाती पूरी तरह से 1,631 कि मी लंबी म्यांमार सीमा की सुरक्षा के लिए उत्तर पूर्वी क्षेत्र में की गई है। यह बल गृह मंत्रालय के नियंत्रण के अधीन कार्य करता है। इस बल की कुल संख्या 66,411 है।



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सीमा सुरक्षा बल (सीसुब)

इस बल को “भरतीय प्रदेशों की रक्षा की पहली दीवार” कहा जाता है। सीसुब की स्थापना 25 बटालियनों और 3 कंपनियों के साथ वर्ष 1965 में की गई थी। वर्तमान में इस बल में 183 बटालियनें हैं। इसके मैदानी गठन में 2 विशेष महानिदेशालय, अर्थात  विशेष महानिदेशक (पूर्वी कमान), और विशेष महानिदेशक (पश्चिमी कमान), 13 सीमांत और 46 क्षेत्रीय मुख्यालय, जल शाखा, हवाई शाखा और अन्य अनुषंगी इकाइयाँ शामिल हैं। सीसुब की मंजूर संख्या है 2,57,025 है। इसकी परिचालन जिम्मेदारी पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगने वाली 6,386.36 कि मी अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक फैली हुई है। इसे सेना के परिचालन नियंत्रण के अधीन जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर भी तैनात किया गया है। 

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वर्ष 1969 में स्थापित इस बल को इसका आधुनिक स्वरुप वर्ष 1983 में दिया गया। सीआईएसएफ सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, नोट मुद्रण प्रेस, हवाईअड्डों, परमाणु बिजली संयंत्रों, अंतरिक्ष संगठनों, औद्योगिक इकाइयों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संग्रहालयों सहित राष्ट्रीय / सामरिक महत्त्व के प्रतिष्ठानों, दिल्ली की सरकारी इमारतों और अन्य महत्वपूर्ण संवेदनशील संगठनों को सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही सीएएसएफ देश का सबसे बड़ा अग्नि सुरक्षा प्रदाता भी है। यह बल 91 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को अग्नि आवरण प्रदान करता है। यह बल विश्व का सबसे बड़ा औद्योगिक सुरक्षा बल है, जिसमें लगभग 1,65,000 कर्मी कार्यरत हैं। कंधार जाने वाली इंडियन एयरलाइन्स की उडान आईसी-814 के अपहरण के मद्देनजर हवाईअड्डों की सुरक्षा का विशेषज्ञ कार्य वर्ष 2000 में सीआईएसएफ को प्रदान किया गया था। उस समय के बाद इस बल की तैनाती देश के 59 हवाईअड्डों पर की गई है, जिसमें महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे शामिल हैं, जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु।


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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ)

वर्ष 1939 में नीमच (मध्यप्रदेश) में “ताज प्रतिनिधि पुलिस” के रूप में स्थापित इस बल का नाम वर्ष 1947 के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल रखा गया। यह आतंरिक सुरक्षा, प्रदान करता है नक्सल गतिविधियों से मुकाबला करता है, पुलिस परिचालन को सहायता प्रदान करता है, संयुक्त राष्ट्र शांतिसेना अभियानों में सहायता करता है वर्ष 1965 तक भारत-पाकिस्तान सीमा को सुरक्षा प्रदान करता था। वर्ष 2001 के संसद हमले के दौरान सीआरपीएफ ने पांच आतंकवादियों को मारा और भारतीय नेताओं की रक्षा की।

सीआरपीएफ सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा बल है, जिसकी 245 बटालियनों में 3,25,000 कर्मी हैं। 

त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) और दृढ़ कार्रवाई के लिए कमांडो बटालियन (कोबरा) सीआरपीएफ के विशेषज्ञ बल हैं जिनका प्रमुख कार्य दंगों, वामपंथी उग्रवाद / अन्य उग्रवाद से निपटना है।  

त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) – वर्ष 1992 में सीआरपीएफ की 10 बटालियनों को चिन्हित किया गया और इन्हें त्वरित कार्रवाई बल की 10 बटालियनों और 4 कंपनियों में परिवर्तित किया गया। आरएएफ सांप्रदायिक दंगों और ऐसी अन्य स्थितियों में प्रभावी आक्रमण बल है। इन 10 बटालियनों को देश के 10 सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील स्थानों में स्थित किया गया है ताकि ऐसी किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करने का कार्य सुविधाजनक बनाया जा सके, और ये बटालियनें एक महानिरीक्षक के पर्यवेक्षण के अंतर्गत कार्यरत हैं। 

आरएएफ की तैनाती की स्थिति : तेलंगाना के रंगारेड्डी में 99 आरएएफ, गुजरात के अहमदाबाद में 100 आरएएफ, उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद में 101 आरएएफ, महाराष्ट्र के नवी मुंबई में 102 आरएएफ, दिल्ली के वजीराबाद में 103 आरएएफ, उत्तर प्रदेश के अलीगढ में 104 आरएएफ, तमिलनाडु के कोयंबटूर में 105 आरएएफ, झारखंड में जमशेदपुर में 106 आरएएफ, मध्यप्रदेश के भोपाल में 107 आरएएफ, उत्तर प्रदेश के मेरठ में 108 आरएएफ।

कोब्रा : वर्ष 2008 में सरकार ने सीआरपीएफ में विशेषज्ञ बल कोब्रा (दृढ़ कार्रवाई के लिए कमांडो बल) की 10 बटालियनों की स्थापना की अनुमति दी। ये बटालियनें कमांडो परिचालन और गुरिल्ला / जंगल युद्ध का कार्य करती हैं, और इनकी तैनाती मुख्य रूप से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में की गई है। आरएएफ की ही तरह ये बटालियनें भी महानिरीक्षक के पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करती हैं। 

[##leaf##  नक्सलवाद पर विशेष, पढ़ें यहाँ]



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The Rapid Action Force

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कोब्रा बल


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भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी)

यह बल उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा करता है, यह अवैध आप्रवासन और सीमा-पार तस्करी को नियंत्रित करता है, भारत-तिब्बत सीमा और पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा करता है, इसे आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है, साथ ही इसे अनेक अभियानों में संयुक्त राष्ट्र शांतिसेना में भी अनेक स्थानों पर तैनात किया गया है।

आईटीबीपी की स्थापना वर्ष 1962 के चीनी आक्रमण के मद्देनजर 04 बटालियनों के एक मध्यम संख्याबल के साथ एक एकीकृत “गुरिल्ला –सह- ख़ुफ़िया-सह-लड़ाकू बल” के तहत की गई थी, जो रसद,संचार और ख़ुफ़िया जानकारी संग्रह के मामले में आत्मनिर्भर है। यह अब एक पारंपरिक सीमा सुरक्षा बल है। आज आईटीबीपी 3,488 कि मी लंबी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करता है, और इसकी  तैनाती 9,000 फुट से 18,750 फुट की ऊंचाई वाले हिमालय के निकटस्थ भारत-चीन सीमा के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में, लद्दाख के काराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जेपचेक ला तक 18,176 फुट ऊंचाई पर स्थित 169 सीमा-चौकियों में की गई है। आईटीबीपी की तैनाती छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी की गई है। इस बल की कुल मंजूर संख्या 89,430 है।

आईटीबीपी के कमांडो की तैनाती अफगानिस्तान में भी की गई है जहाँ यह काबुल स्थित भारतीय दूतावास की सुरक्षा करता है, और जलालाबाद, कंधार, मजार-ए-शरीफ और हेरात स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास की सुरक्षा करता है। आईटीबीपी के कर्मियों को अफगानिस्तान के हेरात स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास पर 23 मई 2014 में हुए फियादीन हमले में निभाई गई उनकी भूमिका के लिए वर्ष 2015 में “शौर्य के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक” प्रदान किया गया था वर्ष 2015 में


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राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी)

वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए एक संघीय आकस्मिकता तैनाती बल के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की स्थापना की गई। भारतीय संघ के एक बल के रूप में एनएसजी की औपचारिक स्थापना वर्ष 1986 में की गई। यह एक विशेषज्ञ आक्रमण बल है जिसे आतंकवाद-विरोधी और अपहरण-विरोधी गतिविधियों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके कमांडो सदस्यों को ब्लैक कैट भी कहा जाता है क्योंकि उनकी वर्दी में प्रमुख रूप से काली पोशाख का प्रतीक चिन्ह है। इस बल को उच्च खतरे वाले विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही यह बल घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की सुरक्षा के लिए आकाश मार्शल का कार्य भी करता है।

यह एक 100 प्रतिशत प्रतिनियुक्ति बल है और इसके सभी कर्मियों की नियुक्ति भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस बलों और अन्य संगठनों से प्रतिनियुक्ति पर की जाती है। इन्हें नामित व्यक्तियों को मोबाइल सुरक्षा प्रदान की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसकी स्थापना से ही एनएसजी ने अनेक कार्रवाइयाँ की हैं जिनमें सितंबर 2002 में गुजरात के अक्षरधाम मंदिर की कार्रवाई, और वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान ताज होटल, ओबेरॉय ट्राईडेंट होटल और नरीमन हाउस की कार्रवाई शामिल हैं।


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विशेष सेवा ब्यूरो, जो वर्तमान सशस्त्र सीमा बल का पूर्ववर्ती था, की स्थापना वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के मद्देनजर वर्ष 1963 में की गई ताकि देश की सीमावर्ती जनसंख्या को सीमा-पार से होने वाली तोड़फोड़, घुसपैठ और गड़बड़ी के खतरे से सुरक्षित करने के लिए ऐसी जनसंख्या का मनोबल बढाया जा सके। वर्ष 2001 में यह गृह मंत्रालय के अधीन एक सीमा सुरक्षा बल बना और परिवर्तित दायित्वों के साथ इसका नाम “सशस्त्र सीमा बल” रखा गया। इस बल को भारत-नेपाल सीमा और भारत-भूटान सीमा की सीमा सुरक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई। एसएसबी की तैनाती भारत-नेपाल सीमा के 1,715 कि मी क्षेत्र में और भारत-भूटान सीमा पर 699 कि मी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए की गई है। एसएसबी में महिला लड़ाकू अधिकारियों की नियुक्ति की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई। एसएसबी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के नियंत्रण और सीमावर्ती जनसंख्या के बीच देश के प्रति अपनत्व की भावना निर्माण करने का कार्य करता है। 


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भारतीय तटरक्षक दल


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Advanced Light Helicopters - Dhruv


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Fast Patrol Vessels - FPVs


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Chetak helicopters


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संपूर्ण केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों इत्यादि पर किया गया व्यय
(वर्ष 2003 से वर्ष 2016 तक)


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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (अर्ध-सैनिक बलों) में महिलाऐं

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भारतीय सेना / सशस्त्र सेनाएं – समग्र संख्याबल


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भारतीय सैन्य बलों के कमीशन प्राप्त अधिकारियों के पद


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भारतीय सेना के लिए रक्षा बजट (रक्षा मंत्रालय)


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भारत की शान



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